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Tuesday, April 3, 2012

naye sitare tum jad do ..

भाव भूमि की इस गागर में मानव प्रेम का रस तुम भर दो , कर्म छेत्र की इस धरती पर कुछ नव ह्स्ताक्च्र्र कर दो . कितना पाया कितना खोया इससे अब ऊपर उठ जावो भारत माता के आंचल मे नये सितारे अब तुम जड़ दो

4 comments:

शालिनी कौशिक said...

nice presentation..फांसी और वैधानिक स्थिति

S.N SHUKLA said...


सार्थक और सामयिक पोस्ट , आभार.
मेरे ब्लॉग " meri kavitayen "की नवीनतम पोस्ट पर आपका स्वागत है .

Vishnukant Mishra said...

Thanks ...Shalini ji and respected Shukla ji ... Due to my illness i could not remain in contact of my blog. that why i may expect u people will excuse me for my delayed reply. thanks .

tbsingh said...

samyanusar