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Thursday, February 10, 2011

aaj praaye lgte hain..

अपने अपने बीते वे कल आज   पराये  से  लगते हैं.,
कभी हकीकत के  किस्से ,बनकर सपने मे दिखते हैं .
उस पल को अब कहाँ भुलाये
जो खुद आज भुला बैठा है
वह निर्मोही याद आ रहा
सोकर जिसे जगा  बैठा है .
फल  उस पहले  तरुवर  के बहुत हमारे से लगते हैं,
कभी हकीकत के  किस्से, बनकर सपने मे  दिखते हैं
आओ थोडा सोते सोते
अब फिर से हम जग जाएँ
गत फिर से आगत होते
आओ उनको पास बुलाएँ
जो  कुछ भी  कह न पाए आज सुनाने वह लगते हैं
कभी हकीकत के किस्से, बनकर सपने मे  दिखते हैं .




Tuesday, February 8, 2011

uttar pradesh ki ..................... ji badhai aise nisthurta ke liye.

कल टीवी पर देख रहे थे.
मुख्यमंत्री  यानि .
सच्ची जन सेविका
प्रदेश कि पोषिका
का निष्ठुर मन तौल रहे थे...
वह अपने बाप के मरने वालों को
सजा दिलाने के लिए चिल्ला रही थी
उनको जोर जोर से अपनी बात सुना रही थी.
उनकी सिक्यूरिटी उसे बार बार धकिया रही थी
मुख्यमंत्री जी अंदर से मुस्कुरा रही थी ..
वह क्या जाने किसी कि बेदना.
उनकी सुख चुकी है संवेदना.

Thursday, February 3, 2011

aao kuch apni bhi kah doon

आओ कुछ अपनी भी कह दूँ ----
आज मैने  सोचा
उनको भ्रष्ट कैसे कहूं ----
मै भी तो देर से कार्यालय आता हूँ..
जब भी कोई बिल पास होता है तो
तयशुदा कमीसन मै भी तो लेता हूँ
अभी कल उसके म्रतक आश्रित दावे का
 निपटान होना था
उसे बुलाया गया था
उसके आर्थिक विपदावों से छुडाया गया था .
जब उसने कुछ शुकराना देना चाहा
तो मेरी  आत्मा ने मुझे धिक्कारा
प्यार से पुचकारा.------
कुछ ले लेने के लिए दुलराया
किन्तु
जब हम उन्नेहे भ्रष्ट कहते हैं
तो हम अपने भी दिल में झाकते हैं
इसीलिए हम सदैव भ्रष्ट आचरण से दूर भागते हैं.
आइये आप भी ऐसा ही कुछ कीजिये
भ्रस्ताचार को  नेस्तनाबूद   कीजिये


 

Friday, January 28, 2011

kb tk vilaap karenge

रास्ट्र मे ब्याप्त भ्रस्टाचार को हम केवल अपने ड्राइंग रूम मे कोसकर दूर नहीं कर सकते . इसके लिए हमे आगे आना होगा . हम अपने गैस सिलेंडर  ब्लेक में लेकर भ्रस्ताचार  को कोसेंगे ? बिजली के मीटर को बंद करके या कम करवाकर, ट्राफिक नियमों को तोडकर , सरकारी दफ्तर के वाहन से पारिवारिक य निजी प्रयोग को करके,रेल यात्रा बिना     टिकट करके , गाँव में बुधिया कि मजदूरी मारकर ,घरेलू नौकर कि तनखाह काटकर हम भ्रस्टाचार को कोसने का हक नहीं रखते हैं.
कम से कम हम इतना संकल्प लें सकते हैं कि हम आज से ऊपर लिखे कोई  कुक्र्त्य नहीं करेगे.   
jaihind

Tuesday, January 25, 2011

26 JAN 2011

पुलकित मन से अभिनंदन है
रोम रोम में अब क्रन्दन है
जन गन मन सारे विस्मित हैं
सापों के फन पर चन्दन है.
लाल  चौक  पर फहर न पाए
सबके प्यारे ध्वजा तिरंगे !
आतंकी क्या विजित रहेंगे
बतलाऊ तुम मुझे TIRNGEY

Monday, January 24, 2011

jhada uuncha rahe hamara....

झंडा ऊंचा रहे हमारा
लगता कितना सुंदर नारा .
लाल चौक पर फहर न पाए
शासन का आदेश ये प्यारा
भारत का सौभाग्य निराला
करें शिखंडी वारा न्यारा .......
जिनके हाँथ देश कि नैया
जन गन का जो बना खेवैया
आतंकित का नही सहारा
झंडा ऊचा रहे हमारा ....
जेके भी भारत क अंग है
यह सुनकर मन बहुत दंग है
झंडा वहां  फहर न पाए
जन गन भी ठहर न पाए
बात देश कि कर न पाए..
गणतंत्र देश का कह कब पाए
यह अब हम को नहीं गवारा
वाही कहेंगे हम जाकर
झंडा ऊंचा रहे हमारा......

Sunday, January 23, 2011

bigbadda

आज पढ़ा जब बिग बी अड्डा
दिखा नया कुछ उसमे फंडा
दर्द दिखा दर्दीले मन से
बच्चन जी का होगा मंगल
घोर उपेछा आभावों बिच
कुश होंगे थोडा हंगल