कौन सुर संतोष देंगे कौन अन्त्श्वेदना .
कौन सा सम्वाद भर देगा ह्रदय मे चेतना.
कब तलक हम शब्द लेंगे दूसरो से उधार,
क्यों न कह दे तुम्ही से आज अपनी वेदना.
तुम यहाँ से मेरे मन की बात सुन सकती तो हो
कौन क्या कहता उसे तुम भूल सकती तो हो.
कब तलक हम दूर से ही मौन कुछ कहते रहेंगे
चिर दूरियों से ही सही तुम तो बुला सकती तो हो .
jo bhi kuch likhta hoon ' ushey samarpit karta hoon. apna bhi mantabya likhen kuch yehi prarthna karta hoon.
Tuesday, September 7, 2010
Saturday, September 4, 2010
sikchak diwas ..aapki pustak ka vimochan aur mera janm diwas.....
I would like to make my salute to my all the teachers ...who had made their holy efforts to make me a man of dedication ... to wards litrature , towards devloping my natinal sprit as well as senstivness towards the humen beings. On the eve of teacher'day I have best wishes to them . Today I have tried my best to seek blessing of my lovely respected teacher Dr. Arun trivedi ji but unfortnately i could not succeed. Probably it has been informed that he is undertreatme and sick . I prey to God to bless him for a long life . he is poet .. he is very good human being... he is always dedicated to welfare of student. LaST YEAR HE HAD presided VIMOCHAN SAMAROH.. OF MY BOOK .......ANJURI BHAR ASPANDAN.. LAST YEAR ON 5 TH SEP..2009.
ON this occasion I would like to remember late Dr. G.D. Sarswat... who was my guru during my graduation and post graduation ... he had also written .SAMMICHHA OF SAID BOOK ANJURI BHAR ASPANDAN. He is no more....but I always felt his presence in my mind.
Fortunately ...today is my birthday.....I take a resolution to adopt the service of Hindi litrature as well as poor and handicapped people. because my self is also physically handicapped.
गुरु हमारे पथ प्रकाश ज्योति किरण तम राहों पर
परम वेदना दूर करे जो मरहम हैं हर घावों पर.
HAPPY TEACHERS DAY.
VK.
ON this occasion I would like to remember late Dr. G.D. Sarswat... who was my guru during my graduation and post graduation ... he had also written .SAMMICHHA OF SAID BOOK ANJURI BHAR ASPANDAN. He is no more....but I always felt his presence in my mind.
Fortunately ...today is my birthday.....I take a resolution to adopt the service of Hindi litrature as well as poor and handicapped people. because my self is also physically handicapped.
गुरु हमारे पथ प्रकाश ज्योति किरण तम राहों पर
परम वेदना दूर करे जो मरहम हैं हर घावों पर.
HAPPY TEACHERS DAY.
VK.
Friday, September 3, 2010
anjuri bhar aspndan ki vars ghanth
अंतस्थल का संवेदन
परमात्मा का थोडा अर्चन
शुभता का जिसमे है वंदन
भारत का उसमे अभिनन्दन
निजता का विलाप क्रन्दन
एक वर्स क हुआ आज
अपना '' अंजुरी iभर अस्पन्दन
सुधि पाठको तथा प्रिय जनों को बहुत बहुत धन्यवाद.... हमारी , यांनी आपकी इस किताब का विमोचन विगत वर्स ५ सितम्बर २००९ को किया गया था. तबसे १०० प्रतियाँ का बिकना तथा २० पुस्तकालयों द्वारा इसकी मांग आपके आशीष एवं स्नेह का ही प्रतीक है
vishnu
परमात्मा का थोडा अर्चन
शुभता का जिसमे है वंदन
भारत का उसमे अभिनन्दन
निजता का विलाप क्रन्दन
एक वर्स क हुआ आज
अपना '' अंजुरी iभर अस्पन्दन
सुधि पाठको तथा प्रिय जनों को बहुत बहुत धन्यवाद.... हमारी , यांनी आपकी इस किताब का विमोचन विगत वर्स ५ सितम्बर २००९ को किया गया था. तबसे १०० प्रतियाँ का बिकना तथा २० पुस्तकालयों द्वारा इसकी मांग आपके आशीष एवं स्नेह का ही प्रतीक है
vishnu
Thursday, September 2, 2010
karmyogi krishn
युग पुरुष कहूँ तुमको
या कर्मयोगी ......
अथवा कहू अंत में भगवान
तुमने नैरास्य मे आशा की एक किरण दिखाई
अर्जुन को ....
द्रौपदी की लाज बचाई
सारथि बन तुमने
रथ की अश्वा वल्गाओं को थमा
अन्याय के शमन के लिए .....
प्रेम की पवित्रता
विरह का उत्सर्ग
राधा के नाम के साथ रहा है तुमसे ऊपर
बाबजूद सभी कुछ के
एक इसी कारन से मै
कर्म पुरुष को
इस्वर मानने को तैयार नहीं.
या कर्मयोगी ......
अथवा कहू अंत में भगवान
तुमने नैरास्य मे आशा की एक किरण दिखाई
अर्जुन को ....
द्रौपदी की लाज बचाई
सारथि बन तुमने
रथ की अश्वा वल्गाओं को थमा
अन्याय के शमन के लिए .....
प्रेम की पवित्रता
विरह का उत्सर्ग
राधा के नाम के साथ रहा है तुमसे ऊपर
बाबजूद सभी कुछ के
एक इसी कारन से मै
कर्म पुरुष को
इस्वर मानने को तैयार नहीं.
Thursday, August 26, 2010
ek bar phir.
सपनों को आने दो
नये घरौंदे बनने दो
इन्ही घरौंदों में कुछ अपना
ज्यादा तो है तेरा सपना.
इन सपनों को आने दो .......
जब तक सपने नहीं दीखते
लक्छ्य नहीं हैं तब तक मिलते
ल्क्च्या बिन्दुओं को पाने को
इन सपनों को आने दो .
नये घरौंदे बनने दो
इन्ही घरौंदों में कुछ अपना
ज्यादा तो है तेरा सपना.
इन सपनों को आने दो .......
जब तक सपने नहीं दीखते
लक्छ्य नहीं हैं तब तक मिलते
ल्क्च्या बिन्दुओं को पाने को
इन सपनों को आने दो .
Monday, August 16, 2010
bhav bhoomi ke naye prasth par
भाव भूमि के नए प्रष्ठ पर नूतन कविता लिखता हूँ .
नई तूलिका नए रंग से नया चित्र फिर गढ़ता हूँ .
तिरसठवां ये नया प्रष्ठ है भारत की आजादी का
भ्रस्टाचार का शीर्षक दे दूँ महंगाई बर्बादी का
सड़क नरेगा सिक्छा सबको चारों तरफ झुनझुना बजता
अस्पताल के द्वार पे budhiya तिल तिल कर रोज है मरता
छोटे से बुखार के बदले कैंसर का इलाज होता है
छोटा डाक्टर अपने को कैंसर का विज्ञ लिखता है.
छात्रा से विद्यालय मे बलात्कार का चलन हो रहा
आतंकवाद नक्सल हिंसा पर मुन्त्री गन का मनन हो रहा.
धर्म जाति की राजनीति पर मूल्ल्यों का हनन हो रहा
आजादी के पावन दिन पर थोड़ी कटुता कहता हूँ
भाव भूमि के नये प्रष्ठ पर नूतन कविता लिखता हूँ .
विष्णु कान्त मिश्र
नई तूलिका नए रंग से नया चित्र फिर गढ़ता हूँ .
तिरसठवां ये नया प्रष्ठ है भारत की आजादी का
भ्रस्टाचार का शीर्षक दे दूँ महंगाई बर्बादी का
सड़क नरेगा सिक्छा सबको चारों तरफ झुनझुना बजता
अस्पताल के द्वार पे budhiya तिल तिल कर रोज है मरता
छोटे से बुखार के बदले कैंसर का इलाज होता है
छोटा डाक्टर अपने को कैंसर का विज्ञ लिखता है.
छात्रा से विद्यालय मे बलात्कार का चलन हो रहा
आतंकवाद नक्सल हिंसा पर मुन्त्री गन का मनन हो रहा.
धर्म जाति की राजनीति पर मूल्ल्यों का हनन हो रहा
आजादी के पावन दिन पर थोड़ी कटुता कहता हूँ
भाव भूमि के नये प्रष्ठ पर नूतन कविता लिखता हूँ .
विष्णु कान्त मिश्र
Saturday, August 14, 2010
swatantrta divs abhinandan
शौर्य सन्ति prem की उमंग में जो लहराए ऐसे तीन रंग के तिरंगे है तुमेह प्रणाम.
हिन्दू सिख मुस्लिम है तेरी सभी संताने करते नमन और करते तुमहे सलाम .
दिलों जां भी देकर के रक्छा करेंगे तेरी अहद आज करते हैं देते हम सभी बयां ..
हिन्दू सिख मुस्लिम है तेरी सभी संताने करते नमन और करते तुमहे सलाम .
दिलों जां भी देकर के रक्छा करेंगे तेरी अहद आज करते हैं देते हम सभी बयां ..
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