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Tuesday, August 28, 2012

बहुत दिनों के बाद... हमारे गाँव में कभी दादी बताती थी ---- उनकी सास ने कब उन्हे दुलराया -- उनके उपर कब उबलती दाल की बटोली.. उड़ेल दी थी .. मैने इसे तब की सास की अज्ञान प्रभुता समझा था .... और आज जब वह रोई तो ---- मुझे याद आया ---- मेरी दादी की सास तो अब भी जिन्दा है ..

1 comment:

शालिनी कौशिक said...

भावनात्मक .शानदार प्रस्तुति.बधाई.तुम मुझको क्या दे पाओगे?