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Friday, December 31, 2010

Friday, December 17, 2010

ab tk aaj 10-30 am

स....... आज भी रोज की तरह उठा हूँ ...थोडा अलसाया था..आज ब्यायाम कुछ ज्यादा ही किया है ...नहाने धोनी के बाद रोज  की ही तरह पूजा कर भगवान को याद करने का ढोंग किया है . ढोंग ही कह सकते हैं क्योकि मन तो असांत रहता है . मेरा नौकर गैस  लेने गया है  भूखा तो नहीं कह सकता परन्तु एक कप चाय से पेट के  अंदर कूदते चूहे मानने वाले नहीं हैं. बेटी कालेज जा चुकी है. ------बस बेटा ब्लॉग लिखते रहो...मेरी पत्नी जब जीवित थी तब कहा करती थी की मेरे न होने पर पता चलेगा.. सही था..विकल्प खोजने में परिवार की इतनी वर्जनाएं हैं की उसे अमली जमा पहनने में बहुत झंझट हैं

Thursday, December 16, 2010

भारती के भाव विह्वल आंसुओ की याचना है


तुम कलम से विरह के अब गीत लिखना छोड़ दो

हास्य की यह रितु नही है एक केवल कामना है ,

तुम चरण चारण की अपनी बात करना छोड़ दो.

भ्रष्ट होते तन्त्र की ब्यथा पर अब कुछ लिखो ,

दर्द से होती तड़प की वेदना पर कुछ लिखो ,

चीर खोती द्रोपदी की नग्नता पर कुछ लिखो..

आतंक भ्रस्टाचार की इन गठरियों को खोल दो..

Tuesday, December 14, 2010

tmanna..

तमन्ना कैसे करिये मंजिलों की , हो जब पैरों में बेडी मरहलों की .
मोहब्बत अपनी भी परवान चढ़ती , कमी शायद थी हममे हौसलों की .
जमी ज्यों ज्यों सिमटती जा रही है लकीरें बढ़ रही हैं फासलों की .
हमेशा सींचती रहती है कांटे सियासत बात करती है गुलों की .
अदालत जब हो मरहूने सियासत कहाँ तक कद्र कीजे फैसलों की .
जुनूं फिर आजिमे दस्ते सफर है इलाही लाज रखना आंवलों की
सिफ़ा होगी हटो ए चारा साजों हवा आने दो माँ के आंचलो की .

Monday, November 29, 2010

बस दूसरों के दर्द पर मत मुस्कुराएये

थोडा स दर्द बांटकर खुशियों को पाइए '
वेदनाएं दूसरों की पास लाइए  .
कांटा चुभा है उसके पैरो में जो अभी ,
आकरके अपने हाँथ से उसको निकालिए .
खुद के भी जख्म आप तब भूल जायेंगे,
आंसुओं को उसके जरा पोंछ डालिए.
यह भी न कर सकें तो इतना ही कीजिये ,
बस दूसरों के दर्द पर मत मुस्कुराएये

Thursday, November 4, 2010

deepawali ka bhav deep.....

अभिनव भाव दीप की लड़ियाँ
जीवन ज्योति बिम्ब लहरा दे .
यशस्वी पर्वत मालाएं
कीर्ति ध्वजा ऊपर फहरा दे
दीपों का ये पर्व दिवाली
दर्द बाँटने आई दिवाली
करे 'श्री ' में ब्रधि दिवाली .
ब्लॉगर की इस दुनिया में
नूतन नव सन्देश रचा दे
पाठक गन के भावों में
नया स्वर्ण प्रकाश बहा दे.

Tuesday, November 2, 2010

aaoo hm sb deep jalayen..........

 आओ हम सब दीप जलाएं ...
अँधियारा जो ब्याप्त है मन में
छिपा हुआ जो अंदर तन में
कलुषित सी उन स्वांशों से
कैसे हम सब दीप जलाएं .....
उस बखरी का दर्द तो जाने ....
जिस की बिटिया संग रेप हुआ था
जिस घर बहू को आग लगी थी ..
जिस घर डेंगू से बेटे का अंत हुआ था...
आतंकी के निर्मूलन में जिसका बेटा सहीद हुआ था..
उस माँ का दर्द भी जाने
जिसकी बिटिया बिनब्याही है...
उस पति की कसक भी समझे...
जिसकी पत्नी स्वर्ग सिधारी....
उस बहना को दर्द भी समझो...
जिस की माँ हैं स्वर्ग सिधारी...
इन सबके घर भी जाकर
इनका अन्तश दर्द मिटायें ..
तब सब मिलकर दिया जल्यें....
आओ हम सब दीप जलाएं .

Wednesday, October 27, 2010

naya muhavara.....

प्रचलन के संचालन में नए सारथी लगे हुए हैं ....
यात्री जो भोले भले हैं एक कोने में टंगे हुए हैं ....
नया मुहवरा  ढूँढ़ ढूँढ़ कर मंजिल जब पाने वाला हूँ
चिंतन के चौराहे पर  जाम के अंदर फसे हुए हैं.

Tuesday, October 26, 2010

SATRKTA SPTAH....

केंद्रीय कार्यालयों में दिनांक २५-१०-१० से १-११-२०१० तक  भ्रष्टाचार निरोधक सप्ताह मनाया जा रहा   है . सभी अधिकारीयों एवं कर्मचारियों को रिस्बत न लेने के लिए शपथ दिलाई गई . इशी नाटक पर प्रस्तुत है एक भ्रष्ट टिपण्णी .....
                        जब शपथ दिलाई जा रही थी ....
                        हमे झूट मूठ की बातें बताई जा रही थी
                        केंद्रीय परिपत्र सुनाया जा रहा था
                        यानि की हमे भूला पाठ पद्य जा रहा था .
                       हमे अचानक ही याद आने लगी सब्जीमंडी ....
                       वही पर मिले थे अपने  " कल्मांडी "
                       क्रत्रिम रसायनों से बनी लौकियाँ बीच रहे थे ....
                       शीलाएं, गिल और रेड्डी भी उन्नेह देख रहे थे ----
                      मैने पूछा....रस्त्र्मंडल से क्या अभी थके नहीं हो. ...
                      क्या अभी किसी पड़ाव पर रुके नहीं हो...
                       रुकने वाले मुर्ख होते है..
                      हम तो देश के खातिर बहुत कुछ धोते   हैं ..
                      मावा,,ढूध  घी  के धंधे में बहुत से अपने ही बन्दों को लगाया है...
                      टूट्ठी सडको का  यह स्वरूप हमारे ही लोगो ने बनाया है..
                       हम सच्चे रास्त्र सेवक हैं....
                        अपनी पहचान खुद बनाते हैं...
                        दूसरों को  इसके लिये बिलकुल नहीं सताते हैं.
                      मुझे लगा इस सप्ताह का स्वरूप साकार हो गया.
                              भ्रस्ताचार पर कल्मंदियों का भरमार हो गया.,

Wednesday, October 13, 2010

apne gaon ka chunav.....

एक बदले हुए अन्तराल पर
माने देखा अपने गाँव की चुनाव पूर्व हलचल
यहाँ पर पहले से अधिक हो गई है
ठर्रे की खपत
नार्तिकियाँ भी अलग अलग खेमो में
जन सेवा के लिए बुलाई  जाती    है ....
बुधिया ,नत्था ,गोबरे के लिए
रात को अब महफिल सजाई  जाती है.
हमारे गाँव का सोनेलाल कल पीकर तुन था
उसने कल ही कहा था
की ओबामा से कह दो 
कल यहाँ का चुनाव देखने आ जाएँ ..
ताकि यहाँ से कुछ सीख कर जाये ....
प्रत्याशी गन एक से बढकर चाले चल रहे हैं
नई महाभारत का एक नया इसलोक लिख रहे हैं.
कोन से प्रधान की पत्नी किसकी रखैल है
किसकी किस डकैत से पेलाम्पैल  है..
पुलिश का कोन कितना दलाल है
थाने पर कोन कितना मचाता बवाल है.
पंचायत चुनाव इसकी  अनूठी मिशल है.

Tuesday, October 12, 2010

ek roop.

कौन सा मै रूप देखूं  कौन से तन को निहारूं ,
कौन छबि अन्तश मे भर लूं कौन  अन्तश से बहारू ?
एक मन को मोहती है एक लोचन नीर बहती ,
एक के कुछ अधर बोलें एक है चितवन से कहती
कौन सा प्रतिबिम्ब उसका ह्रदय के पट पर संवारूं ?
मालिनी वह वाटिका की सुमन हैं उसकी धरोहर
कमलिनी को संग लेकर है प्रवाहित यह सरोवर .
कलश युग्मो  मे सुनहरे दीप ज्योतिर्मय हुए  है
भावना की बेल में कुछ पुष्प अब विकसित हुए हैं.
प्रेम या अनहद की आँखों से उसे कैसे निहारूं

Monday, October 11, 2010

vaani hrday se hai tair lagaati...

शक्ति स्वरूपा हो करुणामयी तुम ,
न्याय का पन्थ सदा दिखलाती .
भक्ति की सरिता प्रवाह मयी तुम,
नाव को संत की पार लगाती.
दीन न हीन कभी रह पाता,
वाणी ह्रदय जब  टेर  लगाती.

Sunday, October 3, 2010

Ayodhya ........Nyay palika abhinandan.

न्याय पालिका का अभिनंदन तीनों न्याय मूर्तियाँ बंदन
लोकतंत्र भारत का जन गन तेरा  भी शत शत अभिनन्दन .
राम रहीम के तुम हो बंसज गंगा यमुना की धारा हो
सम्प्रदाय की पशुता का नही बन  सके  तुम  चारा  हो .
दे उदारता का हम परिचय आपस में  समझौता कर लें.
कठिन नही कुछ भी होने को यधि अंदर से इच्छा कर लें
नेताओं को दूर ही रक्खो चाहे किसी पार्टी का हो
सांप का बंसज इसको समझो चाहे किसी पार्टी का  हो .
यह विवाद अब मिट जायेगा होगा सुखद सवेरा सुन्दर.
राम रहीम का भेद मिटेगा आता स्वर्ण विचार है अन्दर.
शुभ कामनाए .
विष्णुकांत.

Wednesday, September 29, 2010

hm ek hain.....

              माँ भारती के पुष्प हैं  हम कभी बिखरे नही,
              राम हो रहमान हो इन्सान ही होना सही
             कितना कठिन हो फैसला मन्दिर या मस्जिद के लिए
            भाई से पर भाई को बाँटना हमको नही .

            कल अयोध्या  पर फैश्ला आ रहा है ..... हमे अपनी न्याय पालिका पर पूरा यकीं करना चाहिए.यदि कही कुछ आपके मन का नहीं है तो  आप न्यायिक रास्ता ही अपनायें----- किसी भी प्रकार से किसी को उत्तेजना या गलत रास्ता न तो अपनाएं और न ही उस पर चलने की अनुमति डे
जय हिंद.

Wednesday, September 22, 2010

kaise kuch bhi likh paunga.

भावों के कोरे कागज पर क्या कुछ मैं लिख कर दे  पाउँगा.
अन्तश की यह विरह वेदना क्या तुमसे प्रिय  कह पाउँगा ..
जब जब कुछ कहना चाहा है अधर बीच में रुक जाते हैं
आँखों की  बहती धारा में स्वप्न सुनहरे  आ  जाते हैं.
कितना कठिन ब्यक्त कुछ करना अपने सच्चे उद्गारो को.
चाह  चाह कर छिपा न paauun   अंदर की इन मनुहार्रों  को
छावों की इस बगिया में क्या दो पल में रुक पाउँगा .
भावों ..............

Thursday, September 16, 2010

aao hm sb saath raheyn....

राम ने कहा था कभी --
बानर या मनुज सभी
न्याय हेतु लड़ो किन्तु
प्रेम को न भूलो अभी .......
शांति और प्रेम में
अकूत शक्ति  है छिपी...
गाँधी ने भी यही शस्त्र
अहिन्षा के साथ लिया
शांति शौहद्र को ही साथ ले
मानव को इसी का अनूठा मंत्र दिया...
नये तूफ़ान का डर जो आज सता रहा.
सहन सकती सह अस्तित्व को न भूलू कभी..
शंकट की घडी में रास्ता यही बता रहा.

Wednesday, September 15, 2010

shok sndesh.

अत्यंत दुःख के साथ कहना है की  तिवारी जी आज दिनांक १५-०९-२०१० को पञ्च तत्त्व में लीं हो गए . आज उनोहने अपरान्ह १२ बजे अपनी अंतिम सास ली . उनकी आत्मा को सन्ति मेले.
ॐ शांति शांति शांति..

Tuesday, September 14, 2010

aao mhimamai kalivinod ke liye kuch karen......

आई बी एन ७ द्वारा प्रायोजित उस वक्तित्व को आपने जरूर देखा होगा जिसे आमिर खान के कर कमलों द्वारा इंडियन आएदिअल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.. आपने जरूर देखा होगा उस विक्लोंग कलिविनोद को जिसे भूतपूर्व रास्त्रपति ज्ञानी जेल सिंह के कर कमलों द्वार विक्लोंग रत्न से विभूषित किया गया था... यह सम्मान तथा और न जाने कितने सम्मान पाने वाली इस महान विभूति ने विक्लोंग जानो के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया उनके लिए समाज मे इन्होने ब्यापक संघर्स किया उनकी अवरुद्ध जीवन को स्वयं इंजन चालित वहन बनाकर एक गति प्रदान की ...... ....आज वही तिवारी संज्ञा शुन्य , इलाज के लिए भगवान की ऑर निर्निमेष आंखे  तक रहा है.  इलाज के लिए पैसे नहीं है....दोनों किडनी खराब हो चुकी है ...६ लाख रुपए  खर्च हो चुके है. सेप्टिक होने से एक पैर कटा जा चूका है. ..... तिवारी की पत्नी श्रीमती  रमा तिवारी  पूर्ण समर्पण से उनकी आखिरी साँस  तक इलाज में लगी है... उनके एक लड़की तथा  दोनों लडके उस दिन खून  के प्रबंध में लगे थे कही खून भी सुलभता से नहीं मिल रहा था. .......चलते चलते अपने पाठको को ये भी बताते चलूँ की उनकी एक लड़की एवं एक लड़का भी अपनी किसोरावाथ में ही  अपपनी विक्लोंग जनों के सेवा में  न केवल समर्पित है अपितु दोनों लडको को उनकी अभूपुर्व सेवा के लिए  रास्त्रपति पुरस्कार मिल चूका है. एक लड़की को  इंटेल पुरस्कार से सम्मानीटी किया गया...वह कानपूर में तुलसी होपितल के    आई सी यु  में वेंतिलाटर पर भर्ती है..... आएये हम सब उनके जीवन के लिए प्रार्थना करे..
प्रभु कुछ करो मिटा दो उसके जीवन का संताप
सेवा पुण्य किया निरंतर किया कभी न कोई पाप
कष्ट उसे क्यों है अब इतना जिसने सबका कष्ट मिटाया
जिसने सबके आंसू पोचे उस परिवार को क्यों है रुलाया.
 ॐ शांति शांति शांति........

hindi divas.

पावन हिंदी के सागर में ,हैं अमूल्य रत्नों की कड़ियाँ .
कबीरा तुलसी रसखान सूर बुन लो चाहे जितनी लड़ियाँ ..
भक्ति काल से लेकर अबतक  हिंदी प्रवाह रस घोल रहा
अपनों से अपनी भासा में  म्रदुता वाणी मन तौल रहा .
फिल्में  हो या फिर कम्पूटर विश्व में हिंदी छाई है
नई उमंगो  संग अपनी हिंदी दुनिया में  आई है.
कीर्तिमान हिंदी के अब  नई पताका बन फहरे
भाव भूमि की धरती पर उसके प्रभाव हों अति गहरे ...........

आओं आज हम संकल्प ले की हिंदी को अंग्रेगी का विकल्प बनायें.  हिंदी दिवस पर हमारी सभी पथोको को हार्दिक शुबकामनाएं.
विष्णु कान्त मिश्र

Thursday, September 9, 2010

AN HUMBLE REQUEST...

ALL OF OUR READER ARE REQUESTED TO KINDLY BE MY FOLLOWER SO THAT I MAY GOT YOUR KIND MOTIVATION .... TO SERVE  THE NATION AS WELL AS SOCIETY . I HOPE THAT MY LEARNED READERS WILL BE KIND ENOUGH TO CONSIDER MY REQUEST. THANKS.

भाव सुमन जो भी अर्पित  हैं यह सब केवल तुम्हे  समर्पित .
प्रतिक्रियाएं यदि कुछ मिलती उनको पढ़कर होता गर्वित.
मत सम्मति से कुछ सिखकर थोडा सा परिमार्जन करता
मूल्यवान भावो को पाकर अपने मन की गागर भरता...
करे  अनुसरण  अस्पंदन का भाव भरी मनुहार कर रहा ,
अभिनन्दन वंदन अर्चन यह तोतली वाणी से दे रहा ........

LOT OF THANKS.     .......JAI HIND.

Tuesday, September 7, 2010

abhibyakti

कौन सुर संतोष देंगे कौन अन्त्श्वेदना .
कौन सा सम्वाद भर देगा ह्रदय मे चेतना.
कब तलक हम शब्द लेंगे दूसरो से उधार,
क्यों न कह दे तुम्ही से आज अपनी वेदना.
तुम यहाँ से मेरे मन की बात सुन सकती तो हो
कौन क्या कहता उसे तुम भूल सकती तो हो.
कब तलक हम दूर से  ही मौन कुछ कहते रहेंगे
चिर दूरियों से ही सही तुम तो बुला सकती तो हो .

Saturday, September 4, 2010

sikchak diwas ..aapki pustak ka vimochan aur mera janm diwas.....

   I would like to make  my salute to my all the teachers ...who had made their holy efforts to make me a man of dedication ... to wards litrature , towards devloping my natinal sprit as well as senstivness towards the humen beings.  On the eve of teacher'day   I have best wishes to them . Today I have tried my best to seek blessing of my lovely respected teacher Dr. Arun trivedi ji but unfortnately i could not succeed.  Probably  it has been informed that he is undertreatme  and sick . I prey to God  to bless him for a long life . he is poet .. he is very good human being... he is always dedicated to welfare of student.  LaST YEAR HE HAD  presided   VIMOCHAN SAMAROH.. OF MY BOOK  .......ANJURI BHAR ASPANDAN.. LAST YEAR ON 5 TH SEP..2009.
ON  this occasion I would like to remember late Dr. G.D. Sarswat... who was  my guru  during my graduation and post graduation ... he had also written  .SAMMICHHA OF SAID BOOK   ANJURI BHAR ASPANDAN. He is no more....but I always felt his presence in my mind.
Fortunately ...today is my birthday.....I take a resolution to adopt the  service of  Hindi litrature as well as poor and handicapped people. because my self is  also physically handicapped.
गुरु हमारे पथ प्रकाश ज्योति किरण तम राहों पर
परम वेदना दूर करे जो मरहम हैं हर घावों पर.
HAPPY TEACHERS DAY.
VK.

Friday, September 3, 2010

anjuri bhar aspndan ki vars ghanth

अंतस्थल  का संवेदन
परमात्मा का थोडा अर्चन
शुभता का जिसमे है वंदन
भारत का उसमे अभिनन्दन
निजता का विलाप क्रन्दन
एक वर्स क हुआ आज
अपना '' अंजुरी iभर अस्पन्दन
सुधि पाठको तथा  प्रिय जनों को बहुत बहुत धन्यवाद.... हमारी , यांनी आपकी  इस किताब का विमोचन विगत वर्स ५ सितम्बर २००९ को  किया गया था. तबसे १०० प्रतियाँ का बिकना तथा २० पुस्तकालयों द्वारा इसकी मांग आपके आशीष एवं  स्नेह का  ही प्रतीक है
vishnu

Thursday, September 2, 2010

karmyogi krishn

युग पुरुष कहूँ तुमको
या कर्मयोगी ......
अथवा कहू अंत में भगवान
तुमने नैरास्य मे आशा की एक किरण दिखाई
अर्जुन को ....
द्रौपदी की लाज बचाई
सारथि बन तुमने
रथ की अश्वा वल्गाओं को थमा
अन्याय के शमन के लिए .....
प्रेम की पवित्रता
विरह का उत्सर्ग
राधा के नाम के साथ रहा है तुमसे ऊपर
बाबजूद सभी कुछ के
एक इसी कारन से मै
कर्म पुरुष को
इस्वर मानने को तैयार नहीं.

Thursday, August 26, 2010

ek bar phir.

सपनों को आने दो
नये घरौंदे बनने दो
इन्ही घरौंदों में कुछ अपना
ज्यादा तो है तेरा सपना.
इन सपनों को आने दो .......
जब तक सपने नहीं दीखते
लक्छ्य नहीं हैं तब तक मिलते
ल्क्च्या बिन्दुओं को पाने को
 इन सपनों को आने दो .

Monday, August 16, 2010

bhav bhoomi ke naye prasth par

भाव भूमि के नए प्रष्ठ  पर नूतन कविता लिखता हूँ .
नई तूलिका नए रंग से नया चित्र फिर गढ़ता  हूँ .
तिरसठवां ये नया प्रष्ठ है भारत की आजादी का
भ्रस्टाचार का शीर्षक दे दूँ महंगाई बर्बादी का
सड़क नरेगा सिक्छा सबको चारों तरफ झुनझुना बजता
अस्पताल के द्वार पे budhiya तिल तिल कर रोज है मरता
छोटे से बुखार के बदले कैंसर का इलाज होता है
छोटा डाक्टर अपने को कैंसर का विज्ञ लिखता है.
छात्रा से विद्यालय मे बलात्कार का चलन हो रहा
आतंकवाद नक्सल हिंसा पर मुन्त्री गन का मनन हो रहा.
धर्म जाति की राजनीति पर मूल्ल्यों का हनन हो रहा
आजादी के पावन दिन पर थोड़ी कटुता कहता हूँ
भाव भूमि के नये प्रष्ठ पर नूतन कविता लिखता हूँ .
विष्णु कान्त मिश्र

Saturday, August 14, 2010

swatantrta divs abhinandan

शौर्य सन्ति prem की उमंग में जो लहराए ऐसे तीन रंग के तिरंगे है तुमेह प्रणाम.

हिन्दू सिख मुस्लिम है तेरी सभी संताने करते नमन और करते तुमहे सलाम .
दिलों जां भी देकर के रक्छा करेंगे तेरी  अहद आज करते हैं देते हम सभी बयां ..

Tuesday, June 15, 2010

hanuman jayanti.

 जेस्थ  का बड़ा मंगल  उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में  बड़े मंगल के रूप में मनाया जाता है . कदाचित सम्पूर्ण भारत में इसे उत्सव के जिस रूप में मनाये जाने की आल्हादकारी परम्परा लखनऊ में देखी जाती है जन मन के भावो को प्रतिबिंबित करते इस स्वरूप को हम प्रणाम करते है.  लखनऊ की हर गर्लिवों, सरकों, मोहल्लों तथा मंदिरों  में कही प्यासों को मठ सरबत पिलाया जा रहा है तो कही पुरियां और नुक्तियों का भोज बनता जा रहा है . कही कही तो बड़े बड़े पकवानों  का भी वितरण हो रहा है.  पिछले मंगल को किये गए एक सर्वे के अनुशार  लखनऊ में इस प्रकार के छोटे बड़े इस्तालों की संख्या  जो ज्येस्ठ  के बड़े मंगल पर लगते है वह लगभग  ३८७६  है . यह संख्या केवल लखनऊ नगर की ही है इसमें  बक्षी का तलब और इतौन्जा , काकोरी  की संख्य शामिल नहीं है . इन स्टालों पर बिना किशी भेद भाव हर  वर्ग ,समुदाय, जाति, धर्म  को प्रदान की जाति है . इन स्टालों पर  प्रसासनिक अधिकारी, नेता रिक्शा चालक  मजदूर सभी जाना और प्रसाद लेना पसंद करते हैं  . यह प्रसाद प्रभु बजरंग बली के जन्म दिवस पर वितरित होता है .  यह परम्परा  मुस्लिम बद्षाओं के समय से चली आ रही है .  वाजिदअली शाह  के समय से चली आ रही है . प्रारंभ उशी ने किया था.   इस अवसर  पर  काव्य पुष्प की  एक पंखुरी    राम भक्त हनुमान को समर्पित है.....
                         भय मुक्त करे जो समाज को
                         दीं हीन का उद्धार करे
                         ऐसे हनुमान  को बार बार
                         ही हम पुकार करें.

Thursday, June 10, 2010

aspandan

अस्पन्दन  क्रंदन है मेरा भाव भूमि की भाषा में .
तिमिर संजोयें हमने केवल कुछ पाने की आशा में .
प्राप्ति कठिन kuch   सुलभ  है देना जो भी मेरे  पास धरा है.
अस्म्रितियों    पर नहीं दे शकूं मिलने की प्रत्याशा में.                                    

Monday, May 31, 2010

तुम्हारी प्रीति के अक्छर हमारे ह्रदय पटपर
अंकित है एक शिलालेख की तरह
इन अक्छरों को उकेरने की पीड़ा का उपहार
संजोया है हमने  एक धरोहर की मानिंद
जिसकी हिफाजत  में बिताये पल
देते हैं हमे एक अनुपम आनंद
इन अक्छ्रोयुए को प्रणाम .

Tuesday, May 25, 2010

उनको जो नहीं है मेरे साथ

भाव आते रहे भाव जाते रहे ,
हम तुम्हारे बिना क्यों यहाँ रह गए ।
करता निर्माण हूँ इक घरौंदे का फिर ,
ईट गार्रों में आंसू भी है मिल गए।
सोचता हूँ की दीवार वह कौन सी ,
स्वप्न जिसमे tumhaarey धरे रह गए ।
खंड भू का तुम्हरा है अन्दर मेरे ,
चित्र जिस पर तुम्हारे बने रह गए।
गृह के हर द्वार में बजके पायल तेरी ,
मेरे कानो में स्वर गूंजते रह गये .
यह तुम्हारा तुम्ही को समर्पित प्रिये ,
कल्पना लोक में स्वप्न सजते रहे ।
होगा पूरा नहीं यह तुम्हारे बिना ,
मेरे साथी बताओ कहाँ तुम गए ।
आना होगा माये जब भी बुलाऊं तुम्हे ,
तार वीणा के उर में सजाते रहे.

Monday, May 24, 2010

एक गीत .

भाव दीप को आज जलाकर तम समेट लूं तेरे मन का ,
सूर्य रश्मियाँ जहाँ न पहुचें ज्योतिर्मय कर दूं उस तन का ।
यह श्रंगार नहीं कहता है तेरा मैं स्पर्स करूँ,
कहती पवन किन्तु CHALKARKE THODA MAYN UTKARS BHAROON.

Wednesday, May 19, 2010

अपने अपने पल

छड़ो को युगों में बदलते देखा
पर नहीं बदला तुम्हारा रूप
तुम तब भी थे याचक और आज भी
तुम्हे बस मांगते पता हूँ .....
तुमने कभी तीन पग धरती मांग ली
कभी तुमने माँगा किसी माँ से उसके बेटे का कफ़न ।
तुम्हरे मांगने के प्रयोजन भी थे विचित्र ,'
कभी तुमने जो भी माँगा परिक्च्चा के नाम पर
अथवा माँगा दाता को उसे सुधारने के नाम पर .....
यह मांगना कितना ही इस्स्व्रीय हो ॥
लेकिन दाता के लिए हमेसा यह बहुत भरी पड़ा...
तुम हमें छद्म से दूर रहेने की सिक्चा देते आये हो
फिर क्या किये इतने सारे छद्म ....
प्रभु होने के मुखौटे तुम्हारी ही तरह येह बहुत से सत्ताधारी भी लगते है
वह भी लेने लगे है हमारा इम्तिहान ....अभी इन इम्तिहानो पर बगावत होना बाकि है।
बाकि है ।
अब मेरे प्रभु तुम कम से कम हमारा और कोई इम्तिहान न लो।
न लो .....बस.
विष्णु कान्त मिश्र।

Tuesday, May 18, 2010

An Indian in Pittsburgh - पिट्सबर्ग में एक भारतीय: बुद्ध हैं क्योंकि परशुराम हैं

An Indian in Pittsburgh - पिट्सबर्ग में एक भारतीय: बुद्ध हैं क्योंकि परशुराम हैं

श्ट्ठे शात्थ्यम शमाच्रेट

छ्मासीलता की सीमा है आगे कायरता की द्योतक ,
इस मग के अनुगामी को bn jaati है yeh avrodhak ।
geeta mey updesh yehi है duston का उप्छार अपेछित,
अत्त्याचारी शमन जरूरी रामायण भी इसकी पोषक ।
yehi maankr hum sbko भी अपने हैं आदर्श बदलना,
शुभता के रक्च्क बन अन्नायाई का दमन है करना ।
जो बातों मे मधु भरता है पर अंदर से हो वह बिषधर सा ,
लिखता जो सूक्तियां सलोनी कर्म करे जो नित दानव सा ।
झूठे आरोपों का प्रमादी भोला बनकर जो दिखता है ,
वर्नाछार से ही जो भ्रामक मानक जो गढ़ता हो ।
मन तन से अपनी बीमारी भाषा वाणी मे रचता हो ,
जो प्रपंच के नूतन किस्से पन्नों में भी लिख रखता हो ।
छमा पात्र वह क्यों हो सकता एइसा है सिद्धांत न कोई ,
काटेगा वह फसल खेत की जैसे जितनी है वह बोई ।
आदर्शों की परिभासा में दुस्त छमा का पात्र नहीं है ,
आतंकी को दंडित करना किसी रूप में पाप नहीं है ॥






Friday, May 14, 2010

yeh बुन्दूकेयं..... ( थेसे गुंस.)

वह एक बुद्धिजीवी था......
गलती से वह एक बन्धूक रखता है ....
उससे अपनी बन्धूक पर बहूत भरोसा है ....
उससे अपने सब्द कमजोर लगते हैं ...
मैने कहा.....
सब्द गोलियों की बौछार तुमाहरी गोली की मार से कई गुना तेज हैं...
वाकई उस्सने मेरी सलाह पर गौर फ़रमाया॥
औउर उसने गोली बाद में चलाने की धमकी देता हुआ ....
गालियोंओ की बौछार चला दी .....
'' तुम लंगड़े हो ....
अभी तुम्हरी दोनों पैर नहीं हैं
स्साले tउम्हरे दोनों हाँथ भी kaat doonga....
मुझे घर से बुन्धूक लानी होगी ...
तुम्हारी नानी याद आजायेगी.....
मुझे लगा यह बुद्धिजीवी महासय क्या कर रहे है॥
यो तो सूरज को थूक क्रर डरा रहे हैं...
मैने निवेदन किया ...
यह सब्द कुछ जियादा ही तेज हैं...
या तो इनेहेय कुछ और पैना kअरू ...
अथवा इन्नेहेय भूल jआओ ...
अन्ग्रेजून के पास बंधूक और तोपें भी तो थी....
पर गाँधी यानि हमारे बाप्पू क्या कभी उन से दरे थे।
वह तो उनसे बिहा हथियार ही लादे थे।
लेकेन उसे इस time dhn की sakhta जर्रोरत है॥
पत्नी के इलाज के लिए...
घर निर्माण के लिये॥
अब वह जा चूका है॥
वह बहुत अच्छा है ॥
लेकिन दिमाग से थोडा कच्चा है।
मेरी उस्सेसे हुम्दारी है
नहीं कुछ भी उसके लिए बेदर्दी है।
उसके बिगत बुद्धिजीवी कृत्य को सलाम
उसके अंतर बैठे दर्द को प्रणाम।
इस्वर से प्रर्थन है ॥
बुद्धिजीवी को बन्धूक जीवी hओने से bचाओ वह आदमी था आदमी ही रहे ...
उसे हिन्सुक पशुओं की प्रजाति मे जानने bअचाऊ।

Tuesday, May 11, 2010

मेरा मन उस जैसा.....

मन बिहंग के इस आँचल मे सारा छितिज है बौना बौना ,
दौडे यह हर उस कोने मे दिखता जिधर भी कोई खिलौना ॥
सभी खिलौने होते नस्वर PR अभिलासभिलाषाओं के VIRAT पग
चलते चलते कभी न थकते आतुर भरते हैं विशाल डग ।
इन्नेहेय रोकना नहीं सरल है किन्तु असम्भव नहीं है कुछ भी ,
वल्गाओं की डोर थाम हम रोक सकेंगे वेगित रथ भी ।
इछाओं को दमन नही बस करें नियंत्रण केवल उन पर
सब कुछ ही सामान्य रहेगा देखो इन पर थोडा चलकर ॥

Wednesday, May 5, 2010

क्या kahoon

कभी कभी जब कोई पुरुष भी राकचस सा bn जाता है....
अपनी कुटिल कृत्य वाणी का रौद्र रूप वह दिखलाता है.......
तब तब मन की कालिख उसके मुह पर brबस आ जाती है
दोहरे मापदंd की माया उसके ऊपर chha jaati है । l
saavdhan aise logon से सबको ही अब रहना होगा -
बिषधर को साथी चुन्नेनी से हमको अब बचना होगा.

Thursday, April 29, 2010

इन gaddaarron को

मेरा देश महान है....
गद्दारों को दूध पिलाता ------
जन मन पर लाठी बरसाता-----
खुब कसाव को dhoodh pilatey
biriyani murga bhi khilatey ।
अफजल गुरू के ठाठ निराले ....
खाते देशद्रोह के निवाले ------
माधुरी गुप्त एक नया नाम है
देशद्रोह इनका भी काम है....
इनका भी अब बंदन होगा।
जेल मे नित अभिनन्दन होगा।
सेवा होगी इनकी भी नेता इनको करें सलाम...
अपना देश है कितना महान......
फआंसी होंअ नामुमकिन है॥
इनेहेय maarnaa naa मुमकिन है॥
इनके सेवा हमारी शहं ॥
अपना देश है कितना महान...
जी ...हाँ... हम सभी को अपने देश के कर्णधअरूण के इन कृत्यों... से बहुत कोफ़्त है......... सत्तापुछ...उस्सेसेय जियादा विपकच्छा ........ दोनों ही इतनी बेसरम है ....हमारी भारतमाता ने सोचह भी नहीं था। इस्वर से प्रर्थन है की इन्नेहेय सादबुद्धि दे....ताकि हमारा देश...बच सके...

हे राम......

Wednesday, April 28, 2010

आह्लाद ओर विषाद

अंधकार के बाद आता है प्रकश ......
और इशी प्रकाश में समाया है हमारे अंतर
का dard vinayash ......
yehi vinayash vismrit
kara deta है कुछ अपूर्व यादगार पल ----
ऐसे ही मै भूल गया अपनी बिटिया के गठबंधन की
पवित्र वर्ष गाँठ !
मैं भूल गया उसे अलसुबह बधाई देना।
नहीं याद रहा उसे कहना ......
अमर रहे अहिवात तुम्हारा.......
मधु मय हो दिन रात तुम्हारा......
करो सदा तुम पति की सेवा......
पति दे तुमको हर पल मेवा.....
हो संतोष सदा ही मन में -----
हो निरोग दोनों के तन में -------
बनो यशस्वी तुम दोनों ही
पाओ लछ्य सभी दोनों ही ।
मन में कलुष न किंचित ही हो
सबको प्रेम सदा तुम दो ............
नेह प्रेम सबसे ही तुम लो...........

shubkamnayen.......... papa....

Tuesday, April 27, 2010

प्रीति के अक्छर लिखे हैं जो सुनहरे ह्रदय पट पर ,

धो न देना तुम unehe bus ghar ka ek kona samjh kar ।

वर्णमाला प्रेम की likhna kathin hai।

pusp upharon के bhi देना kathin hai।

geet के hi बंद जब अनुबंध होंगे,

hum सुनायेंगे तुमहे kya swar sajakar।

Monday, April 26, 2010

उनके नाम .

तुम सहारा थी मेरी यह कहा ठा कभ्ही
बात यह कुछ समझ में न आई हमेयें ।
साथ मजधार मे छोड़ कुर तुम गयी
वादा यह भी समझ मे न आया हममें '
मेरे साथी बुल्लाओ हममे भी वहां
काम पूरा लिया केर बहुत kउच्च
शादी बेटी की bhi है sirf होनी अभी s
बेटे की भी है सिर्फ होनी अभी ।
mआय आकेला ना रूह सकूँगा एहन
हर पल हर चन में तुम हेर जहन्न मे हो तुम
आसमा मे हो तुम इस धरती पे भी तुम ।
माएं भी हू तुम और वह भी है तुम । ॥

किसे छितिज मे खोज रहा हूँ

आज दूसरी पुण्य तिथि की पूर्व सांध्य है ......मुझे याद आ रही वह कृशकाय , हताश वेदनामयी जीवन से निराश काया जो अभी जीना चाहती थी , हसना चाहती थी, हमारा सहारा बने रहना चाहती थी , जो देखना चाहती थी अपनी छोटी बिटिया की शेष जीवन की कभी न मिटने वाली मुस्कान , जो खिलाना चाहती थी अपनी बड़ी बिटिया की संतान को, जो अपने नाती या नातिन को दुलारना चाहती थी । जो अपने नाती या नातिन को उसके पापा या mउम्मी द्वारा कुछ डाटने ये मारने पर उन दोनों को डाटने की कल्पना करती थी ... उस दिन अपने कमरे से बहार तक आने के लिए असहाय थी ...... मुझे आज भी पश्चाताप है ....आतुम्ग्लानी है की ठीक उसके परायण से पहले की पूर्वसंध्या पर द्दत्ता था ....उस दिन हमने कहा था की तुम नाटक बहुत करती हो .... अपने कमरे से बहार के कमरे तक डॉक्टर द्वारा दी गयी सलाह को नहीं मानती हो ....आऊओ जल्दी से चल्लो... उड़ दिन सुच मे उनेह्हेय ५ मत की दुरी तय करने में आधा घंटा लगा था। बहार वाले कमरे मे कुर्सी पर बठकर भी वह सुम्हल नहीं प् रही थी ॥ जल्दी ही वह ठुक गयी ....मुझे नहीं मालूम था की यह थकन उनकी जिंदगी की आहीरी थकान है । उस दिन यानि २६-४-२००८ को रात्रि मे उनका इसी जी भी करवाया सब कुछ ठीक ठाक बताया गया। लेकिन उनका चेहरा कह रहा था कुत्च भी ठीक नहीं है...... मेरी अआखो में उनकी हालुत देख कर कई बार अंशू आ जाते थे...
माएं साम को भगवंत ऋ के पास जाकर उनके लिए प्रर्थनअ करता था। उसी रत को साम श्रीमती सिहं आई थी ...उनको वह पहचान नहीं पा रही ... थी। ........
मेरी सबसे प्यारी .....अपनी पत्नी दो बेयियों की माँ ......अब नही है यह माएं कासे कहूँ... वह हर समय मेरे साथ रहती है ....लडती है...झगड्थी है......दुलराती है... मेरे खाने ....के लिए जैसे तब वह चिंतित रहती थी अब भी है । वह कभी मुझको बहुत काहित tही अब कुत्च नहीं कहती है.........तुम जहाँ भी हो कुश रहो.......येही उनकी कामना है । बस आज इतना ही।

Thursday, April 22, 2010

हवा के रुख संग न बह सका मैं , किनारे मुझको bula रहे थे

थी आंधियां दर्मिएने मेरे पता जो उनका बता रहे थे ।

लुटा दिया अपनी ही धरोहर कभी था जिसपे नाज मुझको ,

उसी के गम में बातकर हम दिल को रोना सिखा रहे थे ।

हुई

Tuesday, April 20, 2010

स्पंदन कुत्च aise ही........

संबोधन जितने सच्चे थे उतना सच्चा प्यार नहीं था ।
नेह निमंत्रण जितने पाए उनमे कोई सार नहीं था ॥
मन वीणा के तार सुनहरे ,
हमने छेड़े स्वर आने को ।
देखा स्वप्न सुनहरे कल का
तारे नभ से भर लाने को ॥
उद्बोधन जितने मीठे थे उतना प्यार दुलार नहीं था ।
नेह निमंत्रण जितने पाए उनमे कोई सार नहीं था ॥

Monday, April 19, 2010

भावनाएं और यथार्थ क्या स्वार्थ के पूरक हैं

भावनाओं ka प्रवाह vयक्ति के मानश को उथल पुथल की कगार पर पहुच सकता है । वास्तव में प्राणी इस संसार में जब आता है उस समय उसका मानस पटल एक कोरे कागज की तरह होता है परन्तु ज्यों ज्यों वह माया तथा माया जनित स्वार्थो के घेरे में पड़ता जाता है त्यों त्यों वह एकाकी एवं स्वार्थी सा होता जाता है। उसे एन सब बोटों से मतलब नहीं होता है की उसके कृत्य अथवा विचारों एवं मत का कुप्रभाव उसके अपने पर क्या पड़ेगा। उसे केवल और केवल अपने दुर्गमे हितो के प्रभावित हनी की ही एकमात्र चिंता रहती है । संयोगवश यदि आपके पास achal सम्पति है तो उपरोक्त कथन आप पर शतप्रतिशत सत्य होगा। यहाँ तक की आपके अपने ह्रदय के tउकडे aaपके हितो की उपेछा करने में किंचित भी नहीं हिचकेंगे keyonke aapke hit unkey niji स्वार्थो को प्रभावित करते हैं। ऐसे में हमे भावनात्मक होकर नहीं अपितु yathart के dhartal पर vastavikta /avasyakta/ doogami परिणामों को ध्यान में ही रखकर कदम बढ़ाना चाहिए।

बस इतना ही...अपने को ....

Tuesday, April 13, 2010

OUR EXPECTATION & FRUSTRATIN .

NOW DAYS WE ARE RUNNING NOT ALIKE HUMAN BEING ...BUT RENNING AS A MACHINE . WE HAVE NO TIME TO SHARE SENTIMENTS OF OUR OTHER FAMILY MEMBER .. EVEN COUPLS ARE PERFORMING THEIR LIVE LIKE A MACHINE. PERSON BECAME SO DEARER TO EARN MONEY THEY ARE ALSO ENGAGE THEMSELVES TO NEGOTIATE ABT ONLY JOBS ,,,,,,,SALARY .....CONSUMER FRIENDLY LUXRIES... YES THEY WANT TO PURCHASE TOP LUXRY ITEMS WITHOUT THEIR SUITABLE REQUIREMENT. IF THESE THINGS ARE NOT BEING FULFILED THEY CREATES DISPUTE IN THEIR LOVELY LIVES. FULFULING OF THE DESIRE NEEDS MONEY .. MONEY CAN ONLY BE EARN WITH THE HELP OF SOME EXCELLENT JOB. SEARCHING OF THE JOB IS NOT EVEN AN EASY TASK. IF ANY OF THE MEMBER SHOW HIS /HER ENABILITY THEN OTHER ONE BECOMS ANGRY . ALWAYS IT IS NOT A BAD THING . SOME TIMES IT MOTIVATES SECOND PERSON TO BE HONEST TOWARDS HER/HIS SEARCH. BUT DAILY AFFAIRES OF THIS TYPE BECOMES BORING AND CAUSE OF FRUSTRATION AND MUTUAL DISPUTE. I WOULD LIKE TO SUGGEST THAT EVERYONE SHOULD DO THEIR BEST TOSEARCH THE BEST AND COMPARATIVE BETTER JOB. BUT NOT ON A COST OF THEIR PEACE. NATIURE PROVIDES EVERY ONE AS PER THEIR CAPACITY AND NEEDS. BUT NEEDS ARE GOING TO BE ENDLESS . BESIDES THERE ARE SOME OTHER PROBLEMS ARE RUNNING EVERYONE S L IFE .. ALL OF U KNOW I LOST MY BELOVED WIFE ... REALLY I HAVE MUCH SORROW.. BUT IF I WOULD ALWAYS REMAIN IN THAT TRAUM THEN MY LIFE CAN ALSO BE PASSED.... I HAVE TO LIVE FOR SOCIEY... FOR MY CHILDREN...FOR MYSELF ... WHAT EVER GOD HAS PROVIDED i HAVE TO ACCEPT .. BUT ATTEMPTS FOR BETTERMENT ALWAYS CREATS NEW PATH OF JOURNEY OF LIFE. ..... WE MUST ENJOY THIS JOURNEY BY SINGING , DANCING,,,,HELPING... AND MORE OVER MAKING POSITIVE CRATIONS... LIKE PAINTING.. CO MPOSING POEMS..STORY WRITING.. YOGO... DANCING.. IT PRACTISING.. SPORT.. ETC. WHEN THERE IS DESIRE THEN THERE IS WAY .. BUT NOT ON A COST OF STRESS..
i HAVE SAID EVERYTHING ॥ HOPE THAT READERS WILL CONSIDER TO FOLLOW....
VANCHHNAYEN सभी Kओ नहीं मिलती है
कल्पनाये मगर रहती जीवित सदा
दे विधाता नहीं Lअच्य केवल येही कर्म करते रहें हम यो ही सदा।

Friday, April 9, 2010

in dono ko...

मेरी बेटी
मेरी बेटी , कुछ-कुछ पागल सी ,अपनी सरलता के साथ ,मासूम प्रतिमा सी लगती है।है वह बहुत कुछ हठीली जिद्दी सी ,पर बातों के अपनत्व से ,मात्र प्रतिमूर्ति सी लगती हैवह खुश रहना चाहती है ,अपने घर की दुनिया में ,खिलौनों के छोटे संसार में।बाहर निकलने से बहुत घबराती है ,बड़ों की बड़ी दुनिया में ,परिचित-अजनबी चेहरों के बीच ,वह अचानक सहम सी जाती है ,शायद वह अकेली हो जाती है।खिलौनों के संग खेल में ,अक्सर जिद करती है अजीब सी ,साथ मेरे बात करो , दौड़ो-भागो ,खिलौनों से ऐसा वह कहती है।पर कोई भी बात नहीं करता ,मौन और गहरा जाता है ,मेरी बेटी शायद गुस्सा हो जाती है ,हर खिलौना तोड़ देना चाहती है ,और थोड़ी देर बाद ,खिलौनों को पुनः सहेज कर ,बिखराव मिटा देना चाहती है ,अक्सर यह घटना दोहराई जाती है।यह देखकर मैं कहने लगता हूं ,बेटे , ऐसा कभी होता नहीं ,अच्छा अब हंस दो तुम ,तू मुस्कराती अच्छी लगती है।मेरी बेटी समझने की कोशिश में ,और उलझनों में डूबी सी ,ऐसा सचमुच नहीं होता है ?यह प्रश्न मुझसे पूछती है ,मैं स्वयं उलझ जाता हूं ,उत्तर तलाशने लगता हू।अच्छा , मुझको गुड़िया बना दो न ;वह स्वयं उत्तर तलाश लेती है।उसकी उलझनों के आगे ,समझदारी व्यर्थ प्रतीत होती है।उसको गोद में लेकर थपकी देकर ,सुला देना चाहता हूं।शायद जागने पर वह, यह यक्ष प्रश्न भूल जाए ,और हंसती-खेलती-मुस्कराती रहे सदा , मेरी बेटी।। ( this is not written by me ....experienced )

Wednesday, April 7, 2010

apni badki bitiya se ...

dearest Betu...& kapil....
I have no words to begin blog which is required to be posted by me .. I m continuously thinking and thinking since yesterda... I quiestion ...to Almighty ... what is the extent of patience... what is the ethic of survival . what are the meaning of shubh and ashubh.. why those who are not doing holy things they are getting everything and contradactory who are doing the all act of kindness they are being crushed. History shows that Bhagwan Rama , Harishchra etc had done every thing as per the expectation of Vedas , Shruti and religion but all of them have been tested . Those were very great ... we people are related with this bhautik jagat ....and bearing no cosmic power even then we are being made the target of test. .....My wife expired...I remained silent ...I tried to ask these quetion which have also been replied by the almighty but now my children are being tested . I can only prey to God please exempt them from your hard test. please rain ur kindness.. Destiny is nothing except the desire of God. Desires of God probably made on the basis of assessment of act of human being ....specially who are living on earth. In this way i tried to recall that I have did nothing which may be treted immoral. Ihave never crussed any body .. contadractory i have tried to facilate all the needy person as per my capacity...Then why My Great God u r testing my innocent children...why are u not helping .. o...God ...please rain ur kindness.

vk.

Sunday, April 4, 2010

स्वामी रामदेव एवं उनका अभियान

मित्रों !
स्वामी रामदेव ,युग ki तमसमई रात्रि के उदीयमान सूर्य है। bह्रास्ताछार , दमन , annayay, mahilasoshan aadi ki kuruitiyon ka patachep karney ki ekmatra sambhavanayen unihi me dekhi ja sakti hai. aisey byakti ka rajneeti meyn pravesh nischaya hi swagat yogya hai. unka videsho meyn jama dhan ke vapsee ki ghosana yadi vastava mey sahi sabit hogi to yeh des ekbar phir soney ki chidiya kahlaney se koi nahi rok sakta hai.

Thursday, April 1, 2010

लिख दिया है कुछ भी यों ही ब्लॉग लिखते लिखते

कुछ असमंजस ऐसे होते जिन पर निर्णय बहुत कठिन है ,
कुछ प्रतिबंध भी होते ऐसे जिन से भगना बहुत कठिन है ।
मन उतावला जब होता है बाधाएं तब छोटी लगती ,
तर्क वितर्क के गठबंधन में सीमायें सब छोटी लगती
घोस गूंजना विद्रोही का इस समाज में बहुत कठिन है ॥
नीतिशास्त्र की रांह में चलकर कहीं पे थकना बहुत कठिन है।
बस इतना ही ...........

Wednesday, March 31, 2010

एक कविता ऐसे ही......


हर छहं यानि --
समय का एक अंस
जिसे हम कह सकते हैं ===
परमेश्वर का पर्याय
अथवा hamey diya gaya

Thursday, March 25, 2010

shadow of memory

Today is 25th march ....yes on this very day my present residence was alloted to me in the year of 2008 . I had paid my visit there . this new residence was going to be taken due to expected discharge of my wife from hospita...truma centre. I was imagining that when my wife would have come there then she had to see a beautiful vision of this colony. I have planted few beautiful plant of roses,, genda guldaudi...vajayanti...ratrani..... My wife was very much used to like the smell of ratrani... some years before it was available at sitapur residence. I have shifted here on 31 st march ....During shifting i would never forget the contribution of Gopal , brother of my son in law and munna my brother . I could reach at 1-30 AM of 1st april 2008 .. Period from !st april to 10 April was very much waiting period for arrival of my wife.... I was very much anexious to see her. I would like to mention here that due to my disability i never reached upto her bed in hospital except one time when kapil had assisted me to go there . On that occasion my wife had given an vision of her pityness and painful welcome to me and told in very low voice ... why u had come there... if u would have slipped ... go ...to home and take rest ... what i had eaten this question she never forget. On that time also she said me jjjjjaoo..kkuuch ...juice ...pi lena.... d hirey dhirey ..jana...bhid bahut road par hai .. tum na ayaaa karo.....i was very much sad to here this .. and having tears in my eyes .. for which i have very much tried to hide with the presence of my near & Dear. ....On that very day i remain sit on my vehicle up 6 p.m ....when mr.samir came .. to visit there .. i met him and r eturned back .. On that very day when i had seen her face .... i got a signal from my heart that my wife would not remain alive for much time...whole night I could not sleep. Next day i made a Puja with a tearing eyes ...and requested to God ....kindly do not implement what have distiny written in myhead. ....weepingly requested to Maa Durga...Shiva....and Hanuman ji ... Probably they had accepted my request. and granted some more time to live here. .

Now..... further I am not able to write.

काल चक्र की परिधि मे ,
अस्म्रित्यों की ब्यास रेखाएं ,
जब कटती हैं खुदी को =
तब छोड़ जाती हैं
समान्तर रेखाओं के लिए
स्थान ---------
रिक्तता के लिए रिक्तता के लिए=== बस
कुछ ऐसा ही है हमारे पास हमारे पास.......
विष्णु कान्त मिश्र

Wednesday, March 24, 2010

walk of zeal

I am knowing him since 1989. He is 80 yrs young man.He is blind. Every year he used to travel more than 15thousand kilometeres journey of inda. He was retired from Govt School as a Music Teacher.He is running his music school for blinds and also using to teach them Braille . He is assisted by a 16 years poor girl . Today he came in after noon . when he knowcked the doors I felt upset why he came . Unwillingly i welcomed him . He informed me that i reached lucknow at 7 a.m till that time i am travelling in lucknow and met 14 people known by him and collected donation for his institution . he informed there is 14 boys and 12 girls r in tht institution. i felt guilty to had non welcoming spirti,. i want to solute him for the dedication of his noble cause. I can appeal to every one try to learn something from him .

Thursday, March 18, 2010

ASPANDAN...IS MAN KE....

NIRJHAR MUN KE UDGAR BADE ,
KITNEY ANANT IS PARVAT PAR
SUBD ARTH KE MELEY ME ,
YEH ASPANDAN KAISE LUUN BHAR.
KHUSIYAN ANANT DUKH BHI ANANT,
DONO KE MADHYA NA KOI GHAR.
YAYAVAR SA GHOM RAHA
NA DHIKTI KOI RAHN PRAKHAR. .........
READERS' COMMENTS ARE INVITED.

RAY OF PLEASURE.

....THANKS TO GOD ...ONE FIRST GOOD NEWS RECEIVEWD TODAY.. DURING LAST FORTNIGHT OF DARKEN CLOUDS. MY BITIYA TRAPTI HAS GOT 10% HIKE IN HER SALARY BESIDES GETTING AND HADNSOME AMOUNT OF BONUS. IT IS BLESSING OF HER LATE MOTHER .FIRST TIME SHE HAS STARTED NAVRATRA BRAT... HER MAA MALTI WAS GREAT DEVOTEE OF MAA DURGA. THEREFORE I HAVE NO OPTION TO TREAT IT AS A BLESSING OF BOTH THE MAA ...DURGAJI .. AND HER MOTHER. BLESSING HER. ...I PREY TO GOD THAT EVERY DESIRE IN HER BE FULFILLED BY THE GRACE OF GOD. MY VALUEABLE ASSET IS ONLY MY TWO DAUGHTER .. I HOPE THESE TWO WILL PROVIDE ME GREAT CHARMING SATIFICTION AFTER ACHEIVING THEIR TARGETS RESPECTIVELY.

GOD BLESS THEM.

EK GAURAVANVIT PAPA..PITA.

Tuesday, March 16, 2010

NAMSTASYA NAMSTASY NAMSTAYA NAMO NAMAH

MA ...DURGA IS HOLY SYMBOL OF POWER....WHO ALWAYS STANDS TO CRUSH THE SINS .....CRUELTY..... THE GODDESS DURGA ALWAYS INSPIRES THE PEOPLE FOR DEVOTION TOWARDS WORSHIP OF NATURE, TRUTH, AND GOOD TASKS. .....SUCH HUMBLE MOTHER ACCEPT OUR DEVOTION. ...NAMSTASYAI NAMSTASYAI NAMSTASYAI NOMOH NAMAH.......

Thursday, March 11, 2010

aspandan

ghatnaon ki asmritiyon se उठता man meyen krandan
hashaney का तो प्रसन nahi tha par vilap bhi kar na paya,
Bhook nahi thi par bhojan tha jisko maineyn kha na paya ,
दर्द के वीणा तार से निकला अंजुरी भर अस्पन्दन अँजुर भर अस्पन्दन अ।
कल के व्यथा लेख मेँ हमने दर्द का दुस्तावेज भरा था ,
दर्द निवारक डाक्टर का कच्छा चिठा हमने खोला था ,
सरकारी ट्रौमा सेण्टर का नाटक की मजबूरी का हमने बस उल्लेख किया था
मन में जिससे उपजा क्रंदन।
दर्द के वीणा तार से निकले मेरे अंजुरी भर अस्पन्दन। मेरे अंजुरी भर अस्पन्दन

Wednesday, March 10, 2010

darkest dawn of pain

Yes ..... dont be surprise .. on heading of this attempt of witting of my views on a darken memories of TRAUMA CENTRE'S DOCTOR.... ...... It was a morning of 10th March2008 when my wife late smt. malti was crying with unbearable pain .....due to obstructed hernia ...With a reference of my closeset relative who is working at KGMC. Lucknow I have approached to a so called specialist Dr of the Trauma Centre ....Mr.. S.. at his residence where he came out when my said relative knowked at least 5 times his door ispite og having get an telephonic appointment from that Doctor. Thnks to God .. he came ater 35 minuts and after making his primary inspections he dignosed the obstructed Hernia and refered to his nursing home instead of refering to kGMC. We reached there after 20...minutes.. Pain was of his climax.. Cries of my beloved wife almost bursting my hearts but i was totally silent .. there was no tears in my eyes . my small daughter sonal was weaping ..i tryed to console her having no words in mounth. I reached Nishatganj ....Immediately nurse has try to attend .. ang provided bed, Glocose was installed .. one...two..three....bottles of glucose were completed .Meanwhile sample for blood test , urine tests were taken. I dont recall how much amount was taken. ...but it was arround 10 thousand. .....Preparation of operation was complted... there was only wait and wait for Doctor .. who was on his Govt duty ....it was expected that after manajing from there any how he would come . My sister sudha also came there... crying sound of my beloved was increasing multiply. Neither I nor sonal had even taken a single cup of tea... Sister had brought some food for us . Meanwhile two office colleague namely chatter ji and sheet were remain with me since arrival of nishatganj trauma centre..

------------- Now it was 3PM..on my enquiry it was informed that ventilatore is not working there . wehave been advised to get the patient be transferred to KGMC t r auma centra. At that time we had no right to express my displeasure to the Doctors. They have provided us an Ambulance from which we reached Trauma Center. there had again started pathological testing etc. they have provided a huge list of medicine etc . at 7PM after only 4 hours of reach . it is need less to say that my Bhanja who was him self a influncial officer of the center hes attempt was given a such result that Doctors was ready to examine ...... Crying was still on . Operation could began at 9-30 pm . I would like to add here that Anesthesia people had delayed the operation by 2 hours due to dispute between Doctors and anesthesia people . those people came within a very short of time of only 2 hours because they were also know to my bhanja otherwise they could reach there after 11 in night. Thnks to God. I could not reach near the operation theatre due to my disablility. I could remain sit on entrace doors ...my relative, brother, Bahnoi vinod, Rinku, rajkumar , viswanath and office coleagues remain there . I had only an option to make JAP of mahmritunjan atthe door of truma center. .......therewere chain of patients comming i was been shocked to see the situation . .. I would like to mention here one more happening .......One rekshaw puller was badly injurred by a jeep who was brought there alongwith his family and newly married his wife. some young person approached the Doctor. he has given a long list of medicine to purchase ...that younman came back ... and demanded the money from remaining person of that huge gathering . all of those person collected the coines and notes ....all collection could not reach upto the numbers of 300 then his newly wife shown his GATHRI NUMA RUmal .... I could recollect she had firmly declare that she will fulfil the requirement to save her husbnd... but shocked ... her total echequr was only 176 rupees. that was much lesser to fulfill the demand of chemis for medicines cost Rs. 8000/- in those circumstances all became silent ...there was pin drop silence among them . ...At that time my heart was saying that i should give them alll the 8000 as i had 40000 with me .....but i could not stop me to give 500 ... further position i could not know what happend .
My wife's opperation could completed by 3.30 a.m. OF 11TH MARCH 2008.

i REMAIN ONLY SIT THERE.. i COULD DO NOTHING . i HAVE NOW TAKEN THREE GLASS OF WATER AND NOW SOME RELATIVE BRING THE TEA. i HAVE INFORMED THE POSITION TO PRERANA. KAPIL AND PRERANA IS COMING .i HAD TO WAIT . MEAWHILE SAFAI WALA CAME AND THREE TIMES SCOLDED ME TO NOT REMAIN SIT IN THE FRONT OF HOSPITAL . .......... SECURITY PERSON HAS ALSO 5 TIMES SCOLDED ME. I REMAIN SILENT AND HUMBLE....AT LEAST WHEN AGAIN I WAS SCOLDED i HAVE TO PAY 100 TO THEM THEN I WAS ALLOWED TO REMAIN SIT THERE.

REMAINING WILL BE WRITTEN .. NOW I COULD NOT WRITE FURTHER BECAUSE THOSE BITTER MEMORIES MAKE ME SENTIMENTAL .
DEDICATED TO BELOVED LATE MALTI..

Tuesday, March 9, 2010

Look there are so many plants from which we have been provided shadow.....Shadow..means the protector from the sun light//// which protect us f rom lthe rain ....but after some time we the cruel and selfish creatures of the nature will destroy all the trees because we only want multi storey living standare ... let there be no oxygen ...but we will have multistoryes.. let the flood come but we have multystoreyes.....buildings... let therebe no creature to reside there... at least we will fulfil the desire to have lot of buildings .....

yes ...this situation certainly is about to come if we will not stop the building of multystory buidling on a cost of destoying the trees and agricultural land.... there will be starvation.... we must prepare ourselves to welcom the said situation ....

vishnu kant mishra.