Please be follower

SWAGATM ,SWAGTM AAPKA SHUBH SWAGTM



Pages

Monday, April 26, 2010

उनके नाम .

तुम सहारा थी मेरी यह कहा ठा कभ्ही
बात यह कुछ समझ में न आई हमेयें ।
साथ मजधार मे छोड़ कुर तुम गयी
वादा यह भी समझ मे न आया हममें '
मेरे साथी बुल्लाओ हममे भी वहां
काम पूरा लिया केर बहुत kउच्च
शादी बेटी की bhi है sirf होनी अभी s
बेटे की भी है सिर्फ होनी अभी ।
mआय आकेला ना रूह सकूँगा एहन
हर पल हर चन में तुम हेर जहन्न मे हो तुम
आसमा मे हो तुम इस धरती पे भी तुम ।
माएं भी हू तुम और वह भी है तुम । ॥

5 comments:

आमीन said...

कृपया थोड़ा शुद्ध लिखें, भाव बढ़िया हैं

राव एसोसिएट्स said...

galtiya jyada hai i think font converter sahi nahi hai apka.......anyway keep it up

अजय कुमार said...

हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

Nishu said...
This comment has been removed by the author.
जयराम “विप्लव” { jayram"viplav" } said...

कली बेंच देगें चमन बेंच देगें,

धरा बेंच देगें गगन बेंच देगें,

कलम के पुजारी अगर सो गये तो

ये धन के पुजारी वतन बेंच देगें।

हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में राज-समाज और जन की आवाज "जनोक्ति "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . नीचे लिंक दिए गये हैं . http://www.janokti.com/ , साथ हीं जनोक्ति द्वारा संचालित एग्रीगेटर " ब्लॉग समाचार " http://janokti.feedcluster.com/ से भी अपने ब्लॉग को अवश्य जोड़ें .